LINKER(लिंकर) और LOADER(लोडर) क्या है?

http://linker aur loader kya hai?

Computer programming करते समय linker और loader का महत्वपूर्ण स्थान होता है। किसी भी programme का source code, compiler, Assembler, linker और loader से होकर गुजरता है। हमने पिछले article में compiler और assembler के बारे में जाना। आज हम इस article में loader और linker के बारे में जानेंगे।

Linker(लिंकर) क्या है?

Linker एक system software है जो binary language में प्राप्त code को machine पर चलने लायक machine code में बदल देता है। जैसा कि हमने पिछले article में जाना कि compiler एक से अधिक से अधिक प्रोग्रामों का group होता है जो high level computer भाषा मे लिखें गए किसी दूसरी भाषा मे बदल देता है। अब जो कंप्यूटर भाषा मे language है उसे source language कहते है या हम इसे source code भी कह सकते है। और इस source code को जिस language में बदला जाता है उसे target language कहते है। इससे प्राप्त कोड को object code कहते है। object code को ही linker मशीन कोड में बदलता है। application extension .EXE प्रकार की फाइलों को linker ही develope करता है।

Sometimes जब हम कोई बड़ा programme लिखते है तो वो large programme अनेकों subprogramme में बंटा होता है जिन्हें हम modules कहते है अब जब ये modules, compile और assemble होते है तब source programme, generate होता है, इसलिए इन modules को link या combine करके एक single excutable file बनाने की responsiblity लिंकर की होती है।

Linker के प्रकार:-

Linker दो प्रकार के होते है।

Linkage editor:-

यह linker का एक प्रकार है जो relocatable और excutable module को generate करता है।

Dynamic linker:-

यह excutable module के generate होने तक बाहरी module के लिंक को रोकता है।

Loader क्या है?

अब linker के इस काम के बाद आगे का काम loader का होता है। linker के द्वारा generate किये गए machine code को memory में load करने का काम loader का ही होता है।

loader, programme के virtual address को फिजिकल address में बदल देता है, जिसके परिणामस्वरूप फ़ाइल व फोल्डर तैयार हो जाते है।

लोडर के तीन प्रकार है:-

ABSOLUTE LOADING

RELOCATABLE LOADING

DYNAMIC RUN-TIME LOADING

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