What is OSI Model and 7 Layers of OSI Model explained in Hindi

Hello दोस्तों आजकल Technology का जमाना है आजकल हर कोई व्यक्ति अपने सारे काम इसी Technology की मदद से अपने सारे काम easily कर लेता है इसके लिए हमे Internet और एक ऐसी device की जरूरत होती है जिसकी मदद से हम Internet को access कर सके और हम अपना कोई भी काम कर सकते है।

अब आजकल Technology इतनी महत्वपूर्ण है तो तो हमे इसके सभी Basics का पता होना चाहिए इसलिए हम ऐसे article आपके लिए लाते रहते है जिससे कि आपको इन सब चीजों के बारे मे बहुत अच्छी जानकारी मिलती है|

इसी क्रम मे आज हम OSI Model के बारे मे जानने वाले है जिसका computer networking मे महत्वपूर्ण स्थान है अगर आप computer और इससे related सारी जानकारी जानने का शौक रखते है तो आपको OSI Model के बारे मे जानकारी होनी चाहिए।

यह एक ऐसा term है जो आपको बहुत बार सुनने को मिलेगा इसलिए आपको इस Topic को अच्छी तरह जान लेना चाहिए यह आपके लिए helpful रहेगा। तो चलिए जानते है की आखिर OSI Model क्या होता है? साथ ही हम इसकी सभी 7 layers के बारे मे भी जानेंगे। तो चलिए शुरू करते है:-

 

OSI Model क्या है?

  • OSI Model का पूरा नाम Open System Interconnection Model है।

 

  • यह Model यह निश्चित करता है कि किसी एक Computer की Software Application से कोई जानकारी किसी दूसरे Computer की Software Application तक कैसे जाएगी।

 

  • OSI Model मे 7 Layer होती है जिसमे हर कोई layer किसी Particular network के लिए Function करती है।

 

  • OSI model का use किसी network मे दो users के मध्य communication के लिए reference model की तरह किया जाता है|

 

  • इस model मे सात layers होती है जो कि एक दूसरे पर निर्भर नहीं होती है बल्कि उनमे data का transmission होता है|

 

  • OSI Model किसी पूरे task को सात छोटे छोटे task मे divide करके manage कर देता है जिसमे हर layer को कोई ना कोई task assign होता है।

 

  • OSI Model मे प्रत्येक लेयर Self-Contained होती है इसलिए हर layer को जो काम दिया जाता है वह layer उस काम को independently करती है।

 

 

History of OSI Model in Hindi

OSI Model के development की शुरुआत 1970 के दशक से हुई थी जब दो Projects को independently शुरू किया गया था। हालांकि इन Projects को independently शुरू किया गया था

लेकिन इनको शुरू करने के पीछे एक ही उद्देश्य था कि Networking System के एकीकृत Architecture को Define करना। इन दोनों Projects को अलग अलग Organizations के द्वारा develop किया जा रहा था जिसमे एक Project को International Organization for Standardization (ISO) के द्वारा शुरू किया गया था और दूसरे project को International Telegraph and Telephone Consultative Committee (CCITT) के द्वारा चलाया जा रहा था।

इन दोनों International Standard Bodies के समान Networking Models को develop किया गया था इसलिए बाद मे इन दोनों Documents को एक साथ merge करके इसको The Basic Reference Model for Open Systems Interconnections का नाम दिया गया।

इसे हम सामान्यतः Open System Interconnection Reference Model के नाम से भी जाना जाता है। इसे ISO के द्वारा सन 1984 मे publish कर दिया गया।

 

Layers of OSI Model in Hindi

 

  • OSI Model मे सात Layers होती है जिनको 2 भागों मे divide किया गया है Upper Layers और Lower Layers

 

  • इसकी Upper Layer Application Related Issues के साथ deal करती है और Upper Layer मे केवल Software को Implement किया जाता है।

 

  • OSI Model मे application लेयर End User के closest होती है।

 

  • Application Layer और End User दोनों ही Software Application के साथ Interact करते है।

 

  • OSI Model मे Lower Layer का काम Data Transport Issues के साथ Deal करना होता है।

 

  • इसमे मौजूद Data Link Layer और Physical Layer को Hardware और Software दोनों के साथ Implement किया जा सकता है।

 

  • इस Model मे पहली Layer और दूसरी Layer को Media Layer भी कहते है।

 

  • बाकी 5 Layers को Host Layers भी कहते है।

 

  • OSI Model मे चौथी Layer को Heart Of OSI Model भी कहते है।

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OSI model मे सात layers होती है जिनके बारे मे अब हम Detail मे जानेंगे।

    

1:- Physical Layer:-

OSI Model मे सात layers मे से सबसे निचली layer को physical layer कहते है| यह लेयर Electrical Connection के लिए जिम्मेदार रहती है| इस layer मे Digital Connection को electrical connection मे बदल देती है|

यह layer यह भी describe करती है कि connection wired होगा या wireless होगा। physical layer मे information बिट्स के रूप मे रहती है इसलिए यह  Bit Layer भी कहलाती है।

 

Functions of Physical Layer :-

  • Physical layer यह define करती है कि दो या दो से ज्यादा devices आपस मे physically कैसे Connect रहती है।

 

  • यह layer physical connection को activate करती है maintain और deactivate करने का काम करती है।

 

  • Physical Layer दो Devices के बीच Data Transmission को Define करती है।

 

  • यह Layer यह भी Decide करती है कि Network Devices आपस मे किस तरह से Arrange रहती है।

 

  • Physical Layer यह Determine करती है कि किसी Information के Transmission के लिए Signal किस प्रकार का होगा।

 

2:- Data Link Layer :-

OSI model मे data link layer दूसरे नंबर की layer है इस Layer मे data को Data Frame के रूप मे दर्शाया जाता है। यह लेयर Bit के रूप मे प्राप्त data को frame के रूप मे बदल देता है तथा सभी frames को एक एक address देता है।

यह layer physical layer से प्राप्त data को error free करने का काम करती है।

 

Functions of Data Link Layer

 

  • यह Layer दो या दो से ज्यादा Devices के बीच Reliable और Efficient Communication को Provide करती है।

 

  • Data Link Layer यह Ensure करती है अगर किसी भी Data Frame का Transmission होता हा तो वो Error Free हो।

 

  • यह Layer यह Define करती है कि Network मे Data का Format किस प्रकार का होगा।

 

  • Data Link Layer Layer उस Network मे मौजूद प्रत्येक Device के एक Unique Identification के लिए Responsible रहती है।

 

  • इस layer मे Constant Data Rate को Maintain किया जाता है जिससे कि Data मे कोई Corruption ना हो।

 

  • Data Link Layer मे Error Control का काम भी होता है।

 

  • जब दो या अधिक Devices किसी Same Communication Channel से Connected रहती है उस स्थिति मे Data Link Layer Protocols या Determine करते है कि दिए गए Link पर किसी दिए गए समय पर किस Device का Control है।

 

 

Data Link Layer की दो Sub Layers होती है। जो कि निम्नलिखित है:-

 

Logical Link Control Layer :-

यह Layer इसके द्वारा प्राप्त किए गए Packets को Network Layer पर भेजने के लिए जिम्मेदार होती है। यह Network Layer Protocol के address को Header मे से Identify करती है। यह Layer Flow Control को भी नियंत्रित करती है।

 

Media Access Control Layer –

यह लेयर Logical Link Control Layer और Physical Layer को जोड़ने का काम करती है। इसका इस्तेमाल पूरे network मे Data Packets को भेजने के लिए किया जाता है।

 

 

3:- Network Layer:-

यह layer OSI model की तीसरी layer है।  इस layer मे switching तकनीक का प्रयोग किया जाता है।  इसका कार्य I॰P॰ ADDRESS उपलब्ध कराना है। इस layer मे data source और destination address की जांच की जाती है ताकि data तय जगह पर ही पहुचे।

इस layer मे data पैकेट के रूप मे होता है  इसलिए इस layer को Packet Unit भी कहते है।

 

Functions of Network Layer

 

  • यह Network की Condition के आधार पर Data को Source से Destination तक पहुचने के लिए Best Path का Selection करता है।

 

  • Data Link लेयर Packets की Routing और Forwarding के लिए Responsible होती है।

 

  • Routers नेटवर्क layer की 3 तीसरी लेयर यानि कि Network Layer मे काम करते है।

 

  • यह Layer अलग अलग Devices के बीच Logical Connection को Provide करती है।

 

  • Network Layer मे Data Frames के Header मे source और destination Address को add किया जाता है। इसी address के माध्यम से Device को Internet मे Identify किया जा सकता है।

 

  • Routers इस Layer के बहुत ही मुख्य Components होते है जिनका इस्तेमाल Packets के लिए Best Path का selection करने के लिए होता है।

 

 

4;- Transport Layer:-

यह OSI layer की चौथी layer है। इस लेयर को End to End Layer भी कहते है। यह layer यह insure करती है कि deliver होने वाला message error free हो एक sequence मे हो तथा बिना किसी loss का duplication के हो।

  • इस Layer का मुख्य काम यह होता है कि यह Received Data को completely Send करे।
  • यह लेयर Upper Layer से प्राप्त Data को Smaller Units मे Convert करती है जिन्हे हम Segments के नाम से जानते है।
  • इस layer की Service Point Addressing का function होता है।
  • जब Transport Layer को Upper Layers से Data प्राप्त होता है तो यह उस Data को Multiple Segments मे Divide कर देता है और हर Segment को uniquely Identify Sequence Number प्रदान कर देता है।
  • और जब यह message उसकी Destination मे Arrive हो जाता है तब यह Layer उस message को उसके Sequence Number के आधार पर Resemble कर देता है।
  • यह Layer Flow Control का काम भी करती है लेकिन Single Link मे Perform करने के बजाय End-to End perform करती है।
  • यह Layer यह भी ensure करती है कि जो message उसकी Destination तक पहुचेगा वो Error Free हो।

 

5:- Session Layer:-

यह layer OSI की  पाँचवी layer है जो कि computers के मध्य connection को नियंत्रित करती है। यह layer devices के मध्य data के flow को regulate करती है।

 

Functions of Session Layer

 

  • यह लेयर Communicating Devices के बीच interaction को Establish, Maintain और Synchronize करती है।

 

  • यह Layer एक Dialog Controller की तरह काम करती है यानि कि यह यह ऐसी दो Process के बीच Communication को Allow करती है जो कि या तो Full Duplex होते है या Half Duplex होते है।

 

6:- Presentation Layer:-

यह OSI की छठवी layer है इस layer का प्रयोग के encryption तथा decryption के लिए किया जाता है। इस layer को Translation layer भी कहते है क्योंकि यह Data को इस तरह भेजता है की receiver उस data को समझ सके। Presentation Layer को Syntax Layer भी कहते है।

 

  • इस Layer को Translation Layer कहते है क्योंकि जब किन्ही दो Systems के बीच मे Information का Exchange होता है तो हर computer का अलग अलग Encoding Method होता है। इनके बीच इस अलग अलग Encoding Method को अंतर को Handle करते है। यह sender से Sender-Dependent Data को Common Format मे change करता है और उसको Receiver के अनुसार Receiver Dependent Data के Form मे बदल देता है।

 

  • इस layer मे data का Encryption होता है। Encryption किसी भी Data की Privacy को Maintain रखने के लिए जरूरी होता है।

 

  • Presentation Layer मे Data को Compress करके भेजा जाता है।

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7:- Application Layer:-

यह OSI की सांतवी layer है इस layer का मुख्य कार्य वास्तविक एप्लिकेशन तथा अन्य layers के मध्य interface कराना है  यह layer final transfer, email और अन्य network services के लिए जिम्मेदार है।

यह Users और Application Process के Windows की तरह काम करती है क्योंकि यह Network Service को Access करती है।

 

Features of Application Layer

 

यह Network Transparency, Resource Allocation जैसे issues को handle करती है।

 

Application Layer कोई application नहीं है बल्कि यह Application Layer Function की तरह काम करती है।

 

यह Layer End Users को Network Services Provide करती है।

 

Application Layer, Mail को Forward और Storage करने की Facility provide करती है।

 

यह Layer Distributed Database Source Provide करती है और इसका use उस Global Information को Various Object को provide करने के लिए होता है।

 

Advantages of OSI Model

यह एक Generic Model है। इसे Computer Networking मे एक Standard Model के रूप मे Consider किया जा सकता है।

 

OSI Model एक Layered Model है इसमे किसी एक Model मे changes करने पर दूसरी Layers मे कोई Effect नहीं पड़ता है।

 

यह Connection- Oriented और Connection less दोनों प्रकार की Services को Support करता है।

 

OSI Model बहुत Flexible होता है क्योंकि इसमे किसी भी प्रकार के Protocol को implement किया जा सकता है।

 

यह बहुत ही ज्यादा Adaptable और Secure होता है।

 

Disadvantages of OSI Model

  • Sometimes इस Model मे किसी नए Protocol को Fit करना Difficult होता है क्योंकि इसे तब Develop किया गया था जब किसी भी Protocol का Invention नहीं किया गया था।

 

  • यह किसी Particular Protocol को Define नहीं करता है।

 

  • यह पूरी तरह से Theoretically Model है जिसमे किसी भी प्रकार का Practical Implement नहीं किया जा सकता है।

 

  • इसमे सभी Layers एक दूसरे पर Interdependent होती है।   

 

 

Conclusion :-

आज के इस article के माध्यम से हमने OSI Model के बारे मे विस्तार से जाना। आशा है कि यह article आपके लिए helpful रहा होगा। अगर आपको यह article पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर share कीजिए।

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